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SANTON KI AMRUTWANI

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साधना

                                                                                                                                १.वैराग्य ये भी एक रस है . २.हम साधना करते समय ये देखे की हमारा वैराग्य  बड़ा की नहीं ३.मेरी संवेदना बड़ी की नहीं. ३.साधक की आंख भीगी हो ये श्रेष्ट बात है.४.साधक के लिए ये प्रगति महत्व की है.
४.एक युवक रामानुजच्यार्य के पास गया. उनको ये युवक पूछता है मुझे   दीक्षा मिलेगी.आच्यार्यजीने पूछा   ये युवक तुने किसीसे प्यार किया है ? उसने कहा: नहीं. तब आचार्य कहते है तुने किसीसे प्यार नहीं किया हो तो तुझे दीक्षित  करनेकी मेरे पास व्यवस्था नहीं है. ५.प्रेम का अर्थ है रस ,माधुर्य,जीवकी प्राणिमात्र प्रती मानसिक करूणा. ६.हम  दुसरोंको धक्का क्यों देते है? हम रास्तेसे हट क्यों नहीं जाते .संत कहते है मेरे राघव के स्वभावमे जो है वह है प्यार .  ७.संत तुलसीदास कहते है रामही केवल प्रेम पियारा .८.सत्तारूप में  बैठा ब्रम्ह रामरूप में प्रतिपादित करना है .८.राम को जल्दी पाना है तो राम से प्रेम करो ९.कोही कहेगा निर्विकल्प समाधी ,कोही कहेगा योग लेकिन ईश्वर को जल्दी पाना है तो प्रेम से पाया जायेगा.१०.कृष्णमूर्ति कहते है  सायंस की प्रगति हुयी ऐसा सब कहते है  ठीक है लेकिन सही प्रगति तो यही है की हमारी दूसरों के प्रति रही नफ़रत घटी की नहीं .११. प्रेम प्रतीक्षा कर रहा है ,कोही प्रेम कर लो. १२.हमारे आंख के आंसू सूखे ना .                

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